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बाघ के हमले में किसान की मौत, 10 लाख मुआवजा और सरकारी नौकरी की मांग

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शव रामनगर तिराहे पर रखकर ग्रामीणों ने लगाया जाम, अधिकारियों के आश्वासन पर दोपहर बाद खुला रास्ता

 पूरनपुर-पीलीभीत। हजारा थाना क्षेत्र के गांव शांतिनगर में बाघ के हमले में किसान की मौत के बाद परिजनों और ग्रामीणों में आक्रोश फैल गया। शुक्रवार रात परिजनों ने ग्रामीणों के साथ शव रामनगर तिराहे पर रखकर जाम लगा दिया। शनिवार दोपहर करीब एक बजे तक जाम लगा रहा। परिजनों ने मृतक के आश्रितों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और आवास उपलब्ध कराने की मांग की। अधिकारियों के आश्वासन के बाद ग्रामीणों ने जाम खोल दिया। इसके बाद पुलिस ने शव पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया।

 गांव शांतिनगर निवासी किसान मुंशी प्रसाद 28 अगस्त को खेत की निगरानी करने गए थे। परिजनों के मुताबिक, इसी दौरान गन्ने के खेत में बाघ ने उन पर हमला कर दिया और उन्हें खींचकर अंदर ले गया। शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण मौके पर पहुंचे और काफी मशक्कत के बाद किसान को गन्ने के खेत से बाहर निकाला। वह गंभीर रूप से घायल थे। बाद में निजी चिकित्सक ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।

 घटना के बाद मृतक के पुत्र संजय कुमार ने तहसील प्रशासन को प्रार्थना पत्र देकर परिवार के लिए आर्थिक सहायता और अन्य सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग की। उन्होंने मृतक के आश्रितों को 10 लाख रुपये की आर्थिक सहायता, परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी और प्रधानमंत्री आवास योजना अथवा अन्य सरकारी आवास योजना के तहत आवास दिलाने की मांग की है।

 परिजनों और ग्रामीणों ने वन विभाग की कथित लापरवाही की जांच कराने और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों-कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। साथ ही मामले में मुकदमा दर्ज कराने की मांग उठाई गई।

 जाम की सूचना पर एसडीएम मयंक गोस्वामी, तहसीलदार आशीष गुप्ता, हजारा थानाध्यक्ष सरद यादव और पूरनपुर कोतवाल पवन पांडे समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने परिजनों और ग्रामीणों से वार्ता कर उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इसके बाद जाम समाप्त कराया गया।

 ग्रामीणों ने क्षेत्र में लगातार बढ़ रहे जंगली जानवरों के हमलों पर चिंता जताई। उन्होंने वन विभाग से गांवों के आसपास निगरानी बढ़ाने और जंगली जानवरों से सुरक्षा के लिए प्रभावी एवं स्थायी इंतजाम किए जाने की मांग की है।

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